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मोदी ही देश ,मोदी ही सरकार और मोदी ही पार्टी !

अंबरीश कुमार 

नई दिल्ली .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस छद्म राष्ट्रवाद पर सवार हैं उसकी हवा तो पार्टी के प्रमुख संस्थापक लाल कृष्ण आडवाणी ने ही निकाल दी है .मोदी ने आडवाणी से हिसाब बराबर करने के लिए उनका अपमान किया था .ये वही आडवाणी हैं जिन्होंने मोदी को पहली बार सत्ता में पहुंचाया था .अटल बिहारी वाजपेयी के विरोध के बाद भी .पर उन्ही आडवाणी का मोदी ने उनसे बिना बात किए टिकट काट दिया .राष्ट्रपति बनाना तो दूर की बात थी ,उन्हें कदम कदम पर मोदी ने अपमानित किया .आडवाणी इस सबसे आहत थे .वे इससे भी आहत थे कि मोदी अपने अहंकार के चलते पार्टी और देश को भी किनारे कर देते हैं .मोदी लगातार विपक्षी नेताओं को पकिस्तान परस्त और देशद्रोही बता रहे हैं .अब भाजपा के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है ,राजनीतिक रूप से असहमत होने वाले यानी राजनीतिक विरोधियों को भाजपा ने कभी भी राष्ट्र विरोधी नहीं माना है.
मोदी ने भाजपा की स्थापना करने वाले दिग्गज नेताओं को निपटा दिया है .पार्टी के और भी कई बड़े नेता मोदी के निशाने पर रहें हैं .आडवाणी ,मुरली मनोहर जोशी से लेकर यशवंत सिन्हा ,अरुण शौरी हो या शत्रुध्न सिन्हा हों .जो भी उनके सामने आया वह हाशिए पर गया .लोकसभा का चुनाव जीते हुए नेताओं में अगर किसी ने उनका विरोध किया तो उसे किनारे लगा दिया गया .हारे हुए नेता को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया .उत्तर प्रदेश में कलराज मिश्र को किनारे किया गया तो आवाज उठाने की हिमाकत करने वाले सांसद भरत सिंह का टिकट काट दिया गया .मोदी ही सरकार ,मोदी ही देश और मोदी ही पार्टी .ये भाजपा का नया अवतार है जिसमे पार्टी पिछड़ गई और ब्रांड मोदी निखर गए . आडवाणी ने इसी पर हमला किया है .आडवाणी के बाद विरोध के स्वर और तेज हो सकते हैं .मुरली मनोहर जोशी भी ऐसे नेता नहीं हैं जो अपमान का घूंट पीकर रह जाएं .शत्रुध्न सिन्हा तो अब सीधा हमला कर ही रहें हैं .
आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि अपने राजनीतिक विरोधियों को देश का विरोधी मानने की सोच भाजपा की कभी नहीं रही. राजनीतिक विरोधियों को पाकिस्तानपरस्त और देशद्रोही बताने के मोदी और शाह के प्रचार के बीच आडवाणी की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है. आडवाणी ने जो लिखा है उसके मुताबिक भारतीय लोकतंत्र का सार तत्व यह है कि इसमें विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बहुत ज्यादा सम्मान है. ये ही वे दो मुद्दे हैं जिसपर मोदी की सबसे ज्यादा आलोचना होती रही है .विरोधियों को वे निपटाते हैं .विरोध में जो कोई आवाज आए उसे वे दबाते हैं .उनके अपने अख़बार हैं ,पत्रकार हैं ,चैनल हैं .और जो उनका नहीं है उसे वे ठीक से धमकाते भी हैं .हाल में एक टीवी चैनल के शीर्ष पत्रकारों पर उन्होंने अभद्र टिपण्णी की .यह बानगी है मोदी के तौर तरीके की .आडवाणी ने इसी सब को लेकर सवाल उठाया है . 
 
‘नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट’ शीर्षक से अपने ब्लॉग में आडवाणी ने लिखा है - भारतीय लोकतंत्र का सार विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए सम्मान है.अपनी स्थापना के समय से ही भाजपा ने राजनीतिक रूप से असहमत होने वालों को कभी दुश्मन नहीं माना बल्कि प्रतिद्वंद्वी ही माना. उन्होंने आगे लिखा है - इसी प्रकार से राष्ट्रवाद की हमारी धारणा में हमने राजनीतिक रूप से असहमत होने वालों को राष्ट्र विरोधी नहीं माना. पार्टी व्यक्तिगत व राजनीतिक स्तर पर हर नागरिक की पसंद की स्वतंत्रता को प्रतिबद्ध रही है.
 
गौरतलब है कि लालकृष्ण आडवाणी को इस बार लोकसभा चुनाव में पार्टी ने टिकट नहीं दिया है और उनकी पारंपरिक गांधीनगर सीट से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ रहे हैं. आडवाणी ने 1991 से छह बार लोकसभा में निर्वाचित करने के लिए गांधीनगर के मतदाताओं के प्रति आभार प्रकट किया. आडवाणी ने कहा कि पार्टी के भीतर और वृहद राष्ट्रीय परिदृश्य में लोकतंत्र व लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भाजपा की विशिष्टता रही है. इसलिए भाजपा हमेशा मीडिया समेत सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और उनकी मजबूती को बनाए रखने की मांग में सबसे आगे रही है. ब्लॉग में उन्होंने आगे लिखा है , संक्षेप में पार्टी के भीतर और बाहर सत्य, निष्ठा और लोकतंत्र के तीन स्तंभ संघर्ष से मेरी पार्टी के उद्भव के मार्गदर्शक रहे हैं, इन मूल्यों का सार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सुराज में निहित है जिस पर मेरी पार्टी अडिग रही है. आडवाणी ने आगे लिखा है कि आपातकाल के खिलाफ अभूतपूर्व संघर्ष इन मूल्यों का प्रतीक रहे हैं.उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सभी समग्र रूप से भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूती प्रदान करें.
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