ताजा खबर
बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019 कूड़े के ढेर पर बैठी काशी ! अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019

लखनऊ .गयाना/अमेरिका, मॉरीशस और सूरीनाम की गिरमिटिया गायन टीमों के अलावा उत्तर प्रदेश, पं बंगाल, राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ और बिहार की सांस्कृतिक टीमें. लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर का लोकरंग, आगामी 11-12 अप्रैल को जोगिया के मुक्ताकाशी रंगमंच पर उतरने को तैयार है. लोक संस्कृतियों को सहेजने की दिशा में प्रतिबद्ध  एक गंवई संस्था ने मात्र 12  वर्षों में इस आयोजन को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर दिया है. इसके सार्थक प्रयासों का परिणाम है कि आयोजन में विदेशी टीमें, स्वयं के संसाधनों से आ रही हैं. दो साल पूर्व पधारे नीदरलैंड के राजमोहन को यह आयोजन ऐसा भाया कि उन्होंने विदेशों में बसे सभी गिरमिटिया समुदाय के कलाकारों से लोकरंग में आने की अपील की . जिसके परिणामस्वरूप इस वर्ष  गयाना, सूरीनाम और मॉरीशस से टीमें आ रही हैं. ‘लोकरंग 2019’ को गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है. राजमोहन के अलावा दक्षिणी अमेरिकी देश, गयाना के एश्टॉन रमदहल अपनी 6 सदस्यी टीम के साथ आ रहे हैं जो वर्तमान में अमेरिकी नागरिक हैं और अपनी छठी पीढ़ी के ‘तान सिंगर’ हैं . इनके परदादा 1840 के आसपास, इस ‘तान गायकी’ को, बिहार से गयाना ले गये थे. मॉरीशस के पूर्व प्रधान मंत्री की पत्नी सरिता बुधू, जो मॉरीशस भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मिनिस्ट्री ऑफ आर्ट एण्ड कल्चर की अध्यक्ष हैं, 25 महिलाओं की ‘गीत गवाई’ टीम के साथ शिरकत कर रही हैं.  इस टीम को यूनेस्को ने विश्व मानवता की हिफाजत में अतुलनीय योगदान के रूप में मान्यता प्रदान किया गया है. पूर्वांचल का ही नहीं, देश का यह पहला अवसर है जब तीन गिरमिटिया देश एक मंच पर आ रहे हैं. हमेशा की तरह इस कार्यक्रम का शुभारम्भ गांव की महिलाओं के लोकगीत से होगा.  स्थानीय कलाकारों द्वारा ‘सोरठी बृजभार’ गायकी को प्रस्तुत किया जायेगा. 

लोकरंग में पच्छिम बंगाल के बाउल के भिन्न-भिन्न रूप देखने को मिलेंगे. राजस्थानी लोक गायकी और नृत्य के कई रंग देखने को मिलेंगे. दिल्ली से हामिद बहुरूपिया, बहुरूपिया कला से अतिथियों का मनोरंजन करेंगे. लोक शैली के दो नाटकों में -‘बेटी बेचवा’ और ‘राजा फोकलवा’ मंचित होंगे. 
पहली रात प्रस्तुत होने वाले भिखारी ठाकुर कृत नाटक -‘बेटी बेचवा’ में स्त्री पीड़ा को मार्मिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है जो कभी ग्रामीण जीवन का यथार्थ था . इस लोक नाट्य को परिवर्तन रंग मंडली, जीरादेई, सिवान की टीम प्रस्तुत करेगी . नाटक का परिकल्पना और निर्देशन पंकज कुमार राम का है .
दूसरी रात ‘राजा फोकलवा’ नाटक प्रस्तुत किया जायेगा जो एक बहुश्रुत किन्तु  लगभग विस्मृरत लोक-कथा पर आधारित है. इस कथा को परिमार्जित कर समकालीन रूप प्रदान किया गया है. फोकलवा की पुनर्रचना तथा निर्देशन के दौरान लोक - कथात्मरकता तथा लोक - रूपों के संयोजन एवं सामंजस्य  का विशेष ध्याेन रखा गया है. इस नाटक के निर्देशक /लेखक राकेश तिवारी हैं. प्रस्तुति-चित्रोत्पनला लोककला परिषद, रायपुर, छत्तीसगढ़.
जालंधर, पंजाब के पासला गांव से सूफ़ी कौव्वाली की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम पधार रही है जिसका इतिहास 50-60 साल पुराना है . सार्क सम्मेलन में और उस्ताद नुसरत अली खान के साथ भी इस टीम ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया है.  12 अप्रैल को प्रातः 11 बजे से आयोजित विचार गोष्ठी में देश के जाने माने साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी भाग ले रहे हैं. विचार गोष्ठी का विषय है - ‘गिरमिटिया लोकसंस्कृति का पुरबिया संबंध.’  
लोकरंग आयोजन स्थल और जोगिया जनूबी पट्टी गांव को कलाग्राम में बदलने का अनोखा कार्य संभावना कला मंच की टीम करती है जिसके निर्देशक डॉ. राजकुमार सिंह हैं.  पूरे गांव को कविता पोस्टर, भित्ति चित्रों और विविध कलाकृतियों से सजाने में इस टीम का अतुलनीय योगदान है.  इस बार यह टीम दो दिन पूर्व ही गांव में अपना कार्य प्रारंभ कर रही है.  
लोक संस्कृतियों को रेखांकित करते हुए तीन शोध पुस्तकें और 8 पत्रिकाओं का प्रकाशन, आयोजक संस्था की उपलब्धि है. गुमनाम लोक कलाकार रसूल की खोज का श्रेय इसी संस्था को जाता है . आज रसूल इग्नू सहित कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में इसी संस्था की बदौलत शामिल हो चुके हैं. पूर्वांचल के इस सांस्कृतिक जलसे में लोकगीत, नृत्य, वादन, नाटक, भित्ति चित्र, कविता पोस्टर, विचार गोष्ठी आदि विविध प्रकार की लोक संस्कृतियों के दर्शन हांगे. इस आयोजन की तैयारी व्यवस्था में हदीश अंसारी, विष्णुदेव राय, सुरेन्द्र शर्मा, मंजूर अली, भुवनेश्वर राय, इसरायल, संजय कुशवाहा, सिकन्दर, हबीब आदि रात-दिन लगे हुए हैं.
email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • भरत के बदले दागी,नहीं सहेगा बलिया बागी !
  • मोदी ही देश ,मोदी ही सरकार और मोदी ही पार्टी !
  • अख़बारों की लीगल रिपोर्टिंग का यह हाल !
  • पश्चिम में तो गठबंधन भारी,भाजपा की राह मुश्किल
  • छतीसगढ़ में भाजपा का रास्ता आसान नहीं
  • अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
  • साहब की 'सुरुआत' तो फीकी फीकी रही
  • अडानी के सामने बघेल भी दंडवत !
  • कमलनाथ ने ही घेरा है दिग्विजय को ?
  • बनारस में कौन होगा विपक्ष का उम्मीदवार ?
  • कूड़े के ढेर पर बैठी काशी !
  • छतीसगढ़ में आक्रामक हुई भाजपा
  • बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही
  • भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी
  • तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
  • प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ?
  • तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा
  • विदेश में तो बज ही गया डंका
  • साढ़े तीन दर्जन दलों की नाव पर सवार हैं मोदी !
  • यह दौर बिना सिर पैर की ख़बरों का भी है
  • संघ वालों मोदी हटाओ ,हिंदू बचाओ
  • चुनौती बन गया है उत्तर प्रदेश
  • नक़ल का नारा ज्यादा दूर तक नहीं जाता
  • पुलवामा की साजिश स्थानीय थी?
  • बजरंगी को बेल, बाक़ी सबको जेल
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.