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भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी

गिरधारी लाल जोशी

 भागलपुर .भाजपा  ने जदयू   की झोली में सीमांचल , कोशी, और भागलपुर की वहीं सीटें दी है जहां वह बीते चुनाव में शिकस्त खा गई थी. 17-17-6 के फार्मूले में सबसे ज्यादा फायदे में लोजपा रही. जिसने अपनी पसंद की सभी सीटें हासिल की. खगड़िया सीट भी लोजपा के हिस्से गई है. जिस पर भाजपा कोइरी जाति  को साधने के लिए सम्राट चौधरी को उतारना चाहती है. मगर लोजपा नेता रामविलास पासवान उन्हें अपनी  पार्टी का झोपड़ी निशान देने के मूड में नहीं है. लोजपा की टिकट पर 2014 में चुनाव जीते  महबूब कैसर ने अभी तक लोजपा छोड़ने का ऐलान नहीं किया है.
 
           वैसे भाजपा गंगापार सुपौल, मधेपुरा,  किशनगंज, अररिया ,कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका में से एक सीट  भी नहीं जीत सकी थी. इन सीटों पर चुनाव के बाद से ही फतह करने के लिए मंथन चल रहा था. मई 2017 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से नित्यानंद राय ने प्रदेश कार्यसमिति की बैठक भी किशनगंज में की. ताकि कमल  का खिलना संभव हो सके. इस बीच अररिया में हुए लोकसभा के उपचुनाव ने भाजपा की हवा निकाल दी.  भाजपा के प्रदीप सिंह फिर चुनाव हार गए. वे 2014 में राजद के तस्लीमुद्दीन से हारे थे. उनके निधन के बाद उनके बेटे सरफराज आलम से 2018 में हुए उपचुनाव में भी वे पराजित हो गए थे. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तभी से मान बैठा कि इन आठ सीटों पर कमल दूसरे के सहारे ही खिलाया जा सकता है. 
 
 फारबिसगंज के आनंद शर्मा बताते है कि 2018 और 2019 के  राजनैतिक हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है. भाजपा-जदयू साथ लड़ी थी. फिर भी उनका उम्मीदवार परास्त हुआ. भाजपा ने अररिया सीट तो अपने पास रखी है. मगर बाकी सात सीटें जदयू की झोली में डाल दी है. जिसपर भाजपा और जदयू की पकड़  पूर्णिया छोड़कर सब पर कमजोर है. 
 
मिसाल के तौर पर सुपौल और किशनगंज और कटिहार (तारिक अनवर के आने से) कांग्रेस के पास है.अररिया,  मधेपुरा, भागलपुर, बांका राजद जीती थी. बाद में पप्पू यादव राजद से अलग हो गए थे. वहीं पूर्णिया सीट जदयू ने जीती थी. जाहिर है भाजपा इन सीटों पर आज भी  वैसी ही नजर आती है. इसी वजह से ये सीटें जदयू की झोली में गई. 
 
 हालांकि भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष अभय वर्मन कहते है कि भाजपा ने छह अपनी जीती हुई सीटों में से  पांच जदयू को और एक लोजपा को दी है. यह भाजपा की कुर्बानी कम नहीं है? ये सीटें है वाल्मीकिनगर, झंझारपुर, सीवान, गोपालगंज, गया है. नवादा भी भाजपा ने छोड़ी है. जहां से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह जीते थे. लोजपा की जीती मुंगेर से जदयू ने बदली की है. जदयू मुंगेर से अपने मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को लड़वा रही है. वे बीता चुनाव लोजपा की वीणा कुमारी से हार गए थे. इस तरह छह जीती सीटें भाजपा ने जदयू को दी है. 
 
यहां यह ध्यान दिलाना जरूरी है कि 2014 संसदीय चुनाव में भाजपा ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था. जिनमें से 22 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस दफा इनमें से अपनी जीत वाली 16 सीटों का भाजपा ने अपने पास रखा है. एक सीट केवल अररिया हार वाली सीट ली है. इससे एक बात साफ है कि 2014 में  सीमांचल, कोशी और भागलपुर व बांका समेत आठ सीटों पर मोदी लहर और हिंदुत्व बेअसर रहा. जिसे जदयू से मिलकर 2019 फतह करने की भाजपा की पूरी कोशिश है.
 
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