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बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019 कूड़े के ढेर पर बैठी काशी ! अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
भरत के बदले दागी,नहीं सहेगा बलिया बागी !

धीरेंद्र श्रीवास्तव 

लखनऊ. होगा क्या ? अभी वक्त के गर्भ में है, लेकिन दोआबा से तीन बार विधायक रहे सांसद भरत सिंह का टिकट कटने को लेकर बलिया गुस्से में है. इसे लेकर कुछ लोग बोल रहे हैं कि भरत सिंह के बदले दागी - नहीं सहेगा बलिया बागी.भरत सिंह का टिकट मोदी के सामने सिर्फ सवाल पूछने पर कट गया है .ऐसा जानकारों का कहना है .सूत्रों के मुताबिक एक बैठक में जिसमे क्या क्या सरकार ने किया है यह बताने के संदर्भ में भरत सिंह ने कह दिया था ,क्या हुआ है जो बताया जाए .यह टिपण्णी शीर्ष नेता को नागवार गुजरी .नतीजा सामने है .  
पार्टी ने बलिया लोकसभा क्षेत्र से इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अपने भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को उम्मीदवार घोषित किया है.  मस्त भारतीय जनसंघ के समय से पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की भाषा में कहा जाय तो निष्ठावान चौकीदार हैं. वह देश के प्रथम समाजवादी प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के प्रियजनों में रहे हैं. उनका एक लम्बा सार्वजनिक जीवन है. उन्हें दागी कहना उचित नहीं है लेकिन कुछ लोग गुस्से में कह रहे हैं.
 मस्त भाजपा उम्मीदवार के रूप में एक बार पहले भी बलिया लोकसभा क्षेत्र से अपनी तकदीर आज़मा चुके हैं. परिणाम निराशाजनक था, इसलिए 2014 में उन्हें भदोही से मैदान में उतारा गया और वह विजयी रहे. इसके पूर्व भी वह भदोही से ही दो बार सांसद रहे हैं जिसे नज़रअंदाज़ कर भाजपा ने उन्हें इस बार बलिया से उम्मीदवार घोषित किया है.
मस्त के भदोही के कार्यकाल को लेकर उन्हें कुछ लोग बाहरी भी बोल रहे हैं लेकिन श्री मस्त को बाहरी कहना भी उचित नहीं है. वह मूलरूप से बलिया के वासी हैं. फिर भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर बलिया गुस्से में है. इसे लेकर भरत सिंह के खेमें गुस्सा अधिक है लेकिन टिकट के दूसरे उम्मीदवारों को भी पार्टी का यह निर्णय गले से नीचे नहीं उतर रहा है. जो लोग खांटी  भाजपा के शुभचिंतक हैं या जिनका टारगेट केवल मोदी अगेन है, वह भी इस परिवर्तन को लेकर बहुत प्रसन्न नहीं है. इसे लेकर ये लोग भी बोल रहे हैं कि भरत सिंह को हटाना जरूरी था तो उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था. वैसे बलिया में मतदान सातवें चरण में है. इसलिए  मस्त की घोषणा के बाद भी यहाँ से टिकट की दावेदारी थमी नहीं है. इसे लेकर जोरआजमाइश अभी जारी है. भाजपा कार्यकर्ता कार्यालय के सामने भी विरोध करने से बाज नहीं आ रहे हैं.
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  • गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019
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