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बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019 कूड़े के ढेर पर बैठी काशी ! अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
साहब की 'सुरुआत' तो फीकी फीकी रही

शमशेर सिंह

मेरठ .कल भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ से लोकसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है.मेरठ और आसपास 11 अप्रैल को प्रथम चरण में चुनाव है.गौरतलब है कि पिछली बार नरेंद्र मोदी ने यहीं से चुनाव का आगाज किया था और दस में से दस सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार भारी मतों से जीते थे.2014 में मोदी लहर थी जो इस बार नदारद है.2014 में मेरठ,मुजफ्फरनगर, कैराना, खतौली आदि क्षेत्रों में 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के घाव ताजे थे,जाटों और मुसलमानों के बीच एक अविश्वास की बडी लकीर खींच गई थी जिसका फायदा भाजपा को खूब मिला था.संघ परिवार और हिंदूवादी संगठनों ने उन दिनों ऐसा माहौल बना दिया था कि सपा सरकार मुसलमानों की रहनुमाई कर रही है.जाटों ने भाजपा को एक मुश्त वोट दिया और इन इलाकों से सभी दलों का सूपडा साफ हो गया था.आलम ये था कि स्व.चरण सिंह के वंशज भी अपनी हार को बचा नहीं सके.
मगर इस बार माहौल अलग है,पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों से ये वादा किया था कि वे हर तीसरे महीने गन्ना किसानों के बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करेंगे मगर ये वादा खोखला और जुमला हीं साबित हुआ.किसानों की अन्य महत्वपूर्ण मांगों को अनसुना कर दिया गया,धरने पर गए दिल्ली में किसानों पर फायरिंग की गई जिसकी टीस अभी तक किसानों के जेहन में है.
इस बार भी सांप्रदायिक कार्ड खेलने की कई बार कोशिशें हुई थीं मगर जाटों और मुसलमानों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.
मेरठ की रैली में प्रधानमंत्री के पास बताने को वही घिसी पिटी महामिलावट,वंशवाद, चौकीदार, छद्म राष्ट्रवाद आदि आदि जुमला था जो फींका सा लगा.नरेंद्र मोदी ने कहा एक तरफ दमदार भाजपा है तो दूसरी तरफ दागदार विपक्ष.राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जो 70 सालों में खाता नहीं खुलवा सका वो खातों में पैसा कैसे भिजवा सकता है.जाटों को लुभाने के लिए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने पर मजबूर किया था.
प्रधानमंत्री ने रोजगार पर एक शब्द भी नहीं कहा जबकि उनकी चुनावी सभा में अधिकांशतः युवा हीं थे.गन्ना किसानों की समस्याओं पर उनकी चुप्पी ये इशारा कर गई कि हमेशा किसानों को बरगलाया नहीं जा सकता.
2014 से 2019 के दरम्यान राजनीति में बहुत से परिवर्तन हो गए हैं.2014 में सवाल आप पूछते थे आज आपको जवाब देना पड़ रहा है.कई न पूरे होने वाले वादों पर जनता जवाब मांग रही है जिसका आपके पास कोई मारक उत्तर नहीं है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता समझ गई है कि अब उन्हें हिंदू-मुसलमान के मुद्दों से बरगलाया नहीं जा सकता, जनता जमीन पर ठोस कार्य देखना चाहती है.
अगर हिंदू-मुसलमान का मुद्दा इतना प्रभावी होता तो कैराना उप-चुनाव में भाजपा हारती नहीं.नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल की तबब्सुम हसन भाजपा की उम्मीदवार पर जीत हासिल नहीं कर पाती.
जमीनी हकीकत तो ये है कि सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी मजबूत हो चला है, इन्हें परास्त करने के लिए भाजपा को कुछ ठोस वायदे करने होंगे जिसमें अभी तक भाजपा नाकाम रही है.भारत में जातिगत समीकरण पर हीं वोट पड़ते हैं और इस लिहाज से महागठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी प्रभावी दिख रहा है.परिधि समाचार
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  • भरत के बदले दागी,नहीं सहेगा बलिया बागी !
  • मोदी ही देश ,मोदी ही सरकार और मोदी ही पार्टी !
  • अख़बारों की लीगल रिपोर्टिंग का यह हाल !
  • पश्चिम में तो गठबंधन भारी,भाजपा की राह मुश्किल
  • छतीसगढ़ में भाजपा का रास्ता आसान नहीं
  • अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
  • अडानी के सामने बघेल भी दंडवत !
  • कमलनाथ ने ही घेरा है दिग्विजय को ?
  • बनारस में कौन होगा विपक्ष का उम्मीदवार ?
  • कूड़े के ढेर पर बैठी काशी !
  • छतीसगढ़ में आक्रामक हुई भाजपा
  • बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही
  • गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019
  • भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी
  • तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
  • प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ?
  • तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा
  • विदेश में तो बज ही गया डंका
  • साढ़े तीन दर्जन दलों की नाव पर सवार हैं मोदी !
  • यह दौर बिना सिर पैर की ख़बरों का भी है
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