ताजा खबर
बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019 कूड़े के ढेर पर बैठी काशी ! अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
कमलनाथ ने ही घेरा है दिग्विजय को ?
पूजा सिंह
भोपाल . मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल से उम्मीदवार घोषित करने के बाद यह लोकसभा सीट महत्वपूर्ण हो गयी है. सिंह स्वयं राजगढ़ से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें कठिन सीट से चुनाव लड़कर नजीर पेश करने को कहा.
कुछ दिन पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा भी था कि वरिष्ठ नेता होने के नाते सिंह को ऐसी सीट से चुनाव लडऩा चाहिए जहां पार्टी की स्थिति कमजोर हो. कांग्रेस पिछले तीन दशक से अधिक समय से भोपाल में चुनाव नहीं जीती है. आखिरी बार सन 1984 के आम चुनाव में के एन प्रधान कांग्रेस से चुनाव जीते थे. उसके बाद से अब तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है.
हालांकि कांग्रेस की इस घोषणा से भाजपा को भी अपनी रणनीति पर नये सिरे से विचार करने को मजबूर कर दिया है. पार्टी इस सीट से अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही है. भोपाल के वर्तमान सांसद आलोक संजर का टिकट कटना तय है. इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाये जाने की भी चर्चा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव दिग्विजय सिंह के राजनीतिक करियर के लिए आर-पार की लड़ाई साबित होगा. भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक सिंह का नाम घोषित होते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कमान संभाल ली है और वह यह सुनिश्चित करने में जुट गया है कि सिंह यहां से किसी भी तरह जीतने न पायें वहीं सिंह के लिए भाजपा के असंतुष्ट नेता मददगार साबित हो सकते हैं. स्थानीय राजनीति में दलगत निष्ठा से इतर सिंह को पसंद करने वालों की भी कमी नहीं है.
 
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक लज्जा शंकर हरदेनिया कहते हैं, ‘सिंह लंबे समय से कांग्रेस नेतृत्त्व की नापंसद बने हुए हैं. इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ उनके अहम के टकराव की खबरें भी जब तब सामने आई हैं. जाहिर है भोपाल से चुनाव जीतना उनके लिए आसान नहीं होगा. भोपाल के मतदाताओं में बड़ी तादाद सरकारी कर्मचारियों की भी है. वे 15 साल बाद भी सिंह से नाराज हैं. सिंह ने एक ही दिन में 27,000 दैनिक वेतन भोगियों को नौकरी से निकाला था, यह बात लोग अब तक भूले नहीं हैं.’
सिंह की इच्छा राजगढ़ सीट से चुनाव लडऩे की थी जहां से वह सन 1984 और 1991 में सांसद रह चुके हैं.

 

email ईमेल करें Print प्रिंट संस्करण
  • भरत के बदले दागी,नहीं सहेगा बलिया बागी !
  • मोदी ही देश ,मोदी ही सरकार और मोदी ही पार्टी !
  • अख़बारों की लीगल रिपोर्टिंग का यह हाल !
  • पश्चिम में तो गठबंधन भारी,भाजपा की राह मुश्किल
  • छतीसगढ़ में भाजपा का रास्ता आसान नहीं
  • अतिक्रमणकारी थे तो उन्हें मुआवजा क्यों
  • साहब की 'सुरुआत' तो फीकी फीकी रही
  • अडानी के सामने बघेल भी दंडवत !
  • बनारस में कौन होगा विपक्ष का उम्मीदवार ?
  • कूड़े के ढेर पर बैठी काशी !
  • छतीसगढ़ में आक्रामक हुई भाजपा
  • बिहार में तो लड़ेंगी जातियां ही
  • गिरमिटिया महोत्सव के रूप में मानेगा लोकरंग 2019
  • भाजपा ने हारी हुई सीटें जदयू को दी
  • तो शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस के साथ
  • प्रियंका गांधी से कौन डर रहा है ?
  • तो अब धरोहरों से मुक्त हुई भाजपा
  • विदेश में तो बज ही गया डंका
  • साढ़े तीन दर्जन दलों की नाव पर सवार हैं मोदी !
  • यह दौर बिना सिर पैर की ख़बरों का भी है
  • Post your comments
    Copyright @ 2016 All Right Reserved By Janadesh
    Designed and Maintened by eMag Technologies Pvt. Ltd.