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पश्चिम में तो गठबंधन भारी,भाजपा की राह मुश्किल

सुदीप श्रीवास्तव 

मुजफ्फरनगर. सीटों और भाजपा के हिसाब से सर्वाधिक महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश  के प्रथम चरण के चुनाव 11 अप्रैल को होने वाली वोटिंग में भाजपा को नुकसान होना तय है, देखना है कि वह अपना नुकसान कितना बचा सकती है.पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न लोकसभा सीटों पर लोगों से जो बातचीत हुई उससे यह बात उभर कर सामने आई है .
सहारनपुर  की अगर बात की जाये तो यहां 42 फीसद  मुस्लिम आबादी है और पिछले चुनाव में भाजपा 40 फीसद ही वोट प्राप्त कर सकी थी पर दो मुस्लिम उम्मीदवार  होने से उसे  फायदा हुआ था. इस बार भी कांग्रेस और बसपा - सपा गठबंधन से मुस्लिम उम्मीदवार है, हालांकि  यह कहा जा रहा है कि इस बार मुस्लिम मतों में विभाजन नहीं होगा और भाजपा की जीत कठिन है.
कैराना  सीट पर भाजपा ज्यादा मुश्किल  में नज़र आ रही है क्योंकि गठबंधन ने उपचुनाव जीत कर यह साबित किया है कि सपा - बसपा रालोद के मतों का ट्रान्सफर हो सकता है। भाजपा से हुकुम सिंह की पुत्री  मृगांका सिंह का टिकट कटने से भी उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ी है.मुजफ्फरनगर सीट गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा  की सीट है क्यांकि रालोद के अध्यक्ष चौधरी अजित  सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. कागज पर दलित मुस्लिम और जाट का गणित गठबंधन के पक्ष में है, हालांकि  अजित  सिंह की जाटों में पकड़ पहले जैसी नही रही है. फिर भी अधिक संभावना उनके ही जीतने की है.
बागपत - इस सीट पर भाजपा के सत्यपाल सिंह हारते  हुए नजर आ रहे है. रालोद के जयंत चौधरी को दलित और मुसलमान का साथ मिल रहा है। गणित के हिसाब से गठबंधन के 2014 के वोट 5.55 लाख थे जबकि भाजपा का 4.23 लाख वोट मिले थे.
मेरठ - इस लोकसभा का परिणाम कांग्रेस के प्रदर्शन  पर निर्भर करेगा। यहॉ गठबंधन की ओर से बसपा मुस्लिम उम्मीदवार  है, वही कांग्रेस और भाजपा दोनो की ओर से बनिया प्रत्याषी । यहॉ 2014 में बसपा-सपा को मिला कर भाजपा के बराबर वोट मिला था, पर  तब दोनो उम्मीदवार मुस्लिम थे. इस बार अकेला मुस्लिम प्रत्याषी गठबंधन से है इसलिए गठबंधन को लाभ हो सकता है .
गाजियाबाद - इस सीट पर ही भाजपा साफ जीतती हुई नज़र आ रही है. जनरल वीके सिंह को पुलवामा व एयर स्ट्राइक का सीधा लाभ हुआ है. यहां  2014 में ही भाजपा को 57 प्रतिषत वोट मिला था, जबकि गठबंधन की पार्टियों को मिलाकर महज 2.80 लाख वोट मिला था.गौतम बुद्धनगर - इस सीट पर कांटे की  लड़ाई है। डॉ0 महेष षर्मा से नाराजगी के बावजूद भाजपा मोदी के कारण लड़ाई में है। 2014 में उन्हें 50 फीसद वोट मिले थे और सपा - बसपा को मिला कर 44 प्रतिषत वोट। कांग्रेस अगर उच्च जाति के वोटों को पाने में सफल होती है तो गठबंधन की जीत तय हैं.
बिजनौर - इस सीट पर भाजपा को कांग्रेस के द्वारा मुस्लिम उम्मीदवार  देने का लाभ हो रहा है। हालांकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बाहरी उम्मीदवार है. यहां  अगर मुस्लिम मतों का बटवारा बसपा और कांग्रेस में ना हो तभी गठबंधन की जीत होगी अन्यथा भाजपा जीत रही है.कुल मिलाकर भाजपा को इन सीटों पर नुकसान होना तय है अगर भाजपा 04 सीट भी बचा पाई तो 04 का नुकसान होना तय है. स्वयं राजनाथ सिंह इस बात को समझ चुके है और उन्होंने भी माना है कि भाजपा की सीटें उत्तर प्रदेश  में कम हो रही है.लेखक जानेमाने सेफोलोजिस्ट हैं .
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